वाल्मीकि रामायण 6.6.15
न च ऐकमत्ये श्रेयो अस्ति मन्त्रः सो अधम उच्यते ।तस्मात् सुमन्त्रितम् साधु भवन्तो मन्त्रि सत्तमाः॥
na ca aikamatye śreyo asti mantraḥ so adhama ucyate |tasmāt sumantritam sādhu bhavanto mantri sattamāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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