वाल्मीकि रामायण 6.6.18
तरसा युक्त रूपेण सानुजः सबल अनुगः ।समुद्रमुच्छोषयति वीर्येणान्यत्करोति वा॥
tarasā yukta rūpeṇa sānujaḥ sabala anugaḥ |samudramucchoṣayati vīryeṇānyatkaroti vā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें