वाल्मीकि रामायण 6.6.7
तेषाम् तु समवेतानाम् गुण दोषम् वदामि अहम् ।मन्त्रिभिर् हित सम्युक्तैः समर्थैर् मन्त्र निर्णये॥
teṣām tu samavetānām guṇa doṣam vadāmi aham |mantribhir hita samyuktaiḥ samarthair mantra nirṇaye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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