वाल्मीकि रामायण 6.60.54
अन्ये च बलिनस्तस्य कूटमुद्गरपाणयः ।मूर्ध्नि वक्षसि गात्रेषु पातयन् कूटमुद्गरान्॥
anye ca balinastasya kūṭamudgarapāṇayaḥ |mūrdhni vakṣasi gātreṣu pātayan kūṭamudgarān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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