वाल्मीकि रामायण 6.60.56
वारणानां सहस्रं तु शरीरे ऽस्य प्रधावितम् ।कुम्भकर्णस्ततो बुद्धः स्पर्शं परमबुध्यत॥
vāraṇānāṃ sahasraṃ tu śarīre 'sya pradhāvitam |kumbhakarṇastato buddhaḥ sparśaṃ paramabudhyata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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