वाल्मीकि रामायण 6.60.75
वानरैः पर्वताकारैर्लङ्केयं परिवारिता ।सीताहरणसन्तप्ताद्रामान्नस्तुमुलं भयम्॥
vānaraiḥ parvatākārairlaṅkeyaṃ parivāritā |sītāharaṇasantaptādrāmānnastumulaṃ bhayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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