वाल्मीकि रामायण 6.60.81
राक्षसांस्तर्पयिष्यामि हरीणां मांसशोणितैः ।रामलक्ष्मणयोश्चापि स्वयं पास्यामि शोणितम्॥
rākṣasāṃstarpayiṣyāmi harīṇāṃ māṃsaśoṇitaiḥ |rāmalakṣmaṇayoścāpi svayaṃ pāsyāmi śoṇitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें