वाल्मीकि रामायण 6.60.84
महोदरवचः श्रुत्वा राक्षसैः परिवारितः ।कुम्भकर्णो महातेजाः सम्प्रतस्थे महाबलः॥
mahodaravacaḥ śrutvā rākṣasaiḥ parivāritaḥ |kumbhakarṇo mahātejāḥ sampratasthe mahābalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें