वाल्मीकि रामायण 6.62.11
किमर्थमहमादृत्य त्वया राजन् विबोधितः ।शंस कस्माद्भयं ते ऽस्ति को ऽद्य प्रेतो भविष्यति॥
kimarthamahamādṛtya tvayā rājan vibodhitaḥ |śaṃsa kasmādbhayaṃ te 'sti ko 'dya preto bhaviṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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