वाल्मीकि रामायण 6.62.7
अथ दृष्ट्वा दशग्रीवः कुम्भकर्णमुपस्थितम् ।तूर्णमुत्थाय संहृष्टः सन्निकर्षमुपानयत्॥
atha dṛṣṭvā daśagrīvaḥ kumbhakarṇamupasthitam |tūrṇamutthāya saṃhṛṣṭaḥ sannikarṣamupānayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें