वाल्मीकि रामायण 6.64.41
कामं त्विदानीमपि मां व्यादिश त्वं परन्तप ।न परः प्रेषणीयस्ते युद्धायातुलविक्रम॥
kāmaṃ tvidānīmapi māṃ vyādiśa tvaṃ parantapa |na paraḥ preṣaṇīyaste yuddhāyātulavikrama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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