वाल्मीकि रामायण 6.64.5
यत्तु शक्यं बलवता कर्तुं प्राकृतबुद्धिना।अनुपासितवृद्धेन कः कुर्यात्तादृशं बुधः॥
yattu śakyaṃ balavatā kartuṃ prākṛtabuddhinā |anupāsitavṛddhena kaḥ kuryāttādṛśaṃ budhaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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