वाल्मीकि रामायण 6.64.54
दीर्घकालं प्रसुप्तस्य कुम्भकर्णस्य विक्रमम् ।अद्य पश्यन्तु भूतानि भक्ष्यमाणानि सर्वशः॥
dīrghakālaṃ prasuptasya kumbhakarṇasya vikramam |adya paśyantu bhūtāni bhakṣyamāṇāni sarvaśaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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