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वाल्मीकि रामायण 6.65.17
इत्येवमुक्तः संहृष्टो निर्जगाम महाबलः॥
ityevamuktaḥ saṃhṛṣṭo nirjagāma mahābalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंइत्येवमुक्तः संहृष्टो निर्जगाम महाबलः॥
ityevamuktaḥ saṃhṛṣṭo nirjagāma mahābalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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