वाल्मीकि रामायण 6.65.3
गर्जन्ति न वृथा शूरा निर्जला इव तोयदाः।पश्य सम्पाद्यमानं तु गर्जितं युधि कर्मणा॥
garjanti na vṛthā śūrā nirjalā iva toyadāḥ |paśya sampādyamānaṃ tu garjitaṃ yudhi karmaṇā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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