वाल्मीकि रामायण 6.65.36
सर्पैरुष्ट्रैः खरैरश्वैः सिंहद्विपमृगद्विजैः।अनुजग्मुश्च तं घोरं कुम्भकर्णं महाबलम्॥
sarpairuṣṭraiḥ kharairaśvaiḥ siṃhadvipamṛgadvijaiḥ |anujagmuśca taṃ ghoraṃ kumbhakarṇaṃ mahābalam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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