वाल्मीकि रामायण 6.65.39
रक्ताक्षाः सुमहाकाया नीलाञ्जनचयोपमाः।शूलानुद्यम्य खड्गांश्च निशितांश्च परश्वधान्॥
raktākṣāḥ sumahākāyā nīlāñjanacayopamāḥ |śūlānudyamya khaḍgāṃśca niśitāṃśca paraśvadhān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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