वाल्मीकि रामायण 6.65.41
अथान्यद्वपुरादाय दारुणं रोमहर्षणम्।निष्पपात महातेजाः कुम्भकर्णो महाबलः॥
athānyadvapurādāya dāruṇaṃ romaharṣaṇam |niṣpapāta mahātejāḥ kumbhakarṇo mahābalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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