वाल्मीकि रामायण 6.65.5
विक्लवानामबुद्धीनां राज्ञा पण्डितमानिनाम्।शृण्वता सादितमिदं त्वद्विधानां महोदर॥
viklavānāmabuddhīnāṃ rājñā paṇḍitamāninām |śṛṇvatā sāditamidaṃ tvadvidhānāṃ mahodara ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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