वाल्मीकि रामायण 6.69.30
गृहीत्वा प्रासमुल्काभं विरराज नरान्तकः।शक्तिमादाय तेजस्वी गुहः शिखिगतो यथा॥
gṛhītvā prāsamulkābhaṃ virarāja narāntakaḥ |śaktimādāya tejasvī guhaḥ śikhigato yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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