वाल्मीकि रामायण 6.69.32
महापार्श्वो महाकायो गदामादाय वीर्यवान्।विरराज गदापाणिः कुबेर इव संयुगे॥
mahāpārśvo mahākāyo gadāmādāya vīryavān |virarāja gadāpāṇiḥ kubera iva saṃyuge ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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