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वाल्मीकि रामायण 6.69.37
मरणं वापि निश्चित्य शत्रूणां वा पराजयम्॥
maraṇaṃ vāpi niścitya śatrūṇāṃ vā parājayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंमरणं वापि निश्चित्य शत्रूणां वा पराजयम्॥
maraṇaṃ vāpi niścitya śatrūṇāṃ vā parājayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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