वाल्मीकि रामायण 6.69.43
नीलजीमूतसङ्काशं समुद्यतमहायुधम्।दीप्तानलपविप्रख्यैः सर्वतो नैर्ऋतैर्वृतम्॥
nīlajīmūtasaṅkāśaṃ samudyatamahāyudham |dīptānalapaviprakhyaiḥ sarvato nairṛtairvṛtam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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