वाल्मीकि रामायण 6.69.50
सिंहनादान् विनेदुश्च रणे वानरराक्षसाः।शिलाभिश्चूर्णयामासुर्यातुधानान् प्लवङ्गमाः॥
siṃhanādān vineduśca raṇe vānararākṣasāḥ |śilābhiścūrṇayāmāsuryātudhānān plavaṅgamāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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