वाल्मीकि रामायण 6.69.7
शम्बरो देवराजेन नरको विष्णुना यथा।तथा ऽद्य शयिता रामो मया युधि निपातितः॥
śambaro devarājena narako viṣṇunā yathā |tathā 'dya śayitā rāmo mayā yudhi nipātitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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