वाल्मीकि रामायण 6.69.73
यावद्विक्रमितुं बुद्धिं चक्रुः प्लवगपुङ्गवाः।तावदेतानतिक्रम्य निर्बिभेद नरान्तकः॥
yāvadvikramituṃ buddhiṃ cakruḥ plavagapuṅgavāḥ |tāvadetānatikramya nirbibheda narāntakaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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