वाल्मीकि रामायण 6.7.22
अनेन हि समासाद्य देवानाम् बलसागम् ।गृहीतो दैवतपतिर्लङ्काम् चापि प्रवेशितः॥
anena hi samāsādya devānām balasāgam |gṛhīto daivatapatirlaṅkām cāpi praveśitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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