वाल्मीकि रामायण 6.7.23
पीतामहनियोगाच्च मुक्तः शम्बरवृत्रहा ।गतस्त्रिविष्टपम् राजन् सर्वदेवनमस्कृतः॥
pītāmahaniyogācca muktaḥ śambaravṛtrahā |gatastriviṣṭapam rājan sarvadevanamaskṛtaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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