वाल्मीकि रामायण 6.7.24
तमेव त्वम् महाराज विसृजेन्द्रजितम् सुतम् ।यावद्वानरसेनाम् ताम् परामाम् नयति क्ष्हयम्॥
tameva tvam mahārāja visṛjendrajitam sutam |yāvadvānarasenām tām parāmām nayati kṣhayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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