वाल्मीकि रामायण 6.70.17
अथाश्वास्य महातेजाः कृच्छ्राद्देवान्तको बली।आविध्य परिघं घोरमाजघान तदा ऽङ्गदम्॥
athāśvāsya mahātejāḥ kṛcchrāddevāntako balī |āvidhya parighaṃ ghoramājaghāna tadā 'ṅgadam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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