वाल्मीकि रामायण 6.70.2
आरूढो मेघसङ्काशं वारणेन्द्रं महोदरः।वालिपुत्रं महावीर्यमभिदुद्राव वीर्यवान्॥
ārūḍho meghasaṅkāśaṃ vāraṇendraṃ mahodaraḥ |vāliputraṃ mahāvīryamabhidudrāva vīryavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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