वाल्मीकि रामायण 6.70.42
खड्गप्रहाराभिहतो हनूमान् मारुतात्मजः।आजघान त्रिशिरसं तलेनोरसि वीर्यवान्॥
khaḍgaprahārābhihato hanūmān mārutātmajaḥ |ājaghāna triśirasaṃ talenorasi vīryavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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