वाल्मीकि रामायण 6.70.50
हतं त्रिशिरसं दृष्ट्वा तथैव च महोदरम्।हतौ प्रेक्ष्य दुराधर्षौ देवान्तकनरान्तकौ॥
hataṃ triśirasaṃ dṛṣṭvā tathaiva ca mahodaram |hatau prekṣya durādharṣau devāntakanarāntakau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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