वाल्मीकि रामायण 6.70.55
अथर्षभः समुत्पत्य वानरो रावणानुजम्।मत्तानीकमुपागम्य तस्थौ तस्याग्रतो बली॥
atharṣabhaḥ samutpatya vānaro rāvaṇānujam |mattānīkamupāgamya tasthau tasyāgrato balī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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