वाल्मीकि रामायण 6.72.18
स तान् सर्वान् समादिश्य रावणो राक्षसाधिपः।मन्युशल्यं वहन् दीनः प्रविवेश स्वमालयम्॥
sa tān sarvān samādiśya rāvaṇo rākṣasādhipaḥ |manyuśalyaṃ vahan dīnaḥ praviveśa svamālayam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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