वाल्मीकि रामायण 6.74.10
सुग्रीवमङ्गदं नीलं शरभं गन्धमादनम्।गवाक्षं च सुषेणं च वेगदर्शिनमाहुकम्॥
sugrīvamaṅgadaṃ nīlaṃ śarabhaṃ gandhamādanam |gavākṣaṃ ca suṣeṇaṃ ca vegadarśinamāhukam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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