वाल्मीकि रामायण 6.74.19
श्रुत्वा जाम्बवतो वाक्यमुवाचेदं विभीषणः।आर्यपुत्रावतिक्रम्य कस्मात् पृच्छसि मारुतिम्॥
śrutvā jāmbavato vākyamuvācedaṃ vibhīṣaṇaḥ |āryaputrāvatikramya kasmāt pṛcchasi mārutim ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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