वाल्मीकि रामायण 6.74.24
ततो वृद्धमुपागम्य नियमेनाभ्यवादयत्।गृह्य जाम्बवतः पादौ हनुमान् मारुतात्मजः॥
tato vṛddhamupāgamya niyamenābhyavādayat |gṛhya jāmbavataḥ pādau hanumān mārutātmajaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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