वाल्मीकि रामायण 6.74.32
तस्य वानरशार्दूल चतस्रो मूर्ध्निसम्भवाः।द्रक्ष्यस्योषधयो दीप्ता दीपयन्त्यो दिशो दश॥
tasya vānaraśārdūla catasro mūrdhnisambhavāḥ |drakṣyasyoṣadhayo dīptā dīpayantyo diśo daśa ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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