वाल्मीकि रामायण 6.74.43
नानाद्रुमलताकीर्णं विकासिकमलोत्पलम्।सेवितं देवगन्धर्वैः षष्टियोजनमुच्छ्रितम्॥
nānādrumalatākīrṇaṃ vikāsikamalotpalam |sevitaṃ devagandharvaiḥ ṣaṣṭiyojanamucchritam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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