वाल्मीकि रामायण 6.74.5
ब्राह्ममस्त्रं ततो धीमान् मानयित्वा तु मारुतिः।विभीषणवचः श्रुत्वा हनुमांस्तमथाब्रवीत्॥
brāhmamastraṃ tato dhīmān mānayitvā tu mārutiḥ |vibhīṣaṇavacaḥ śrutvā hanumāṃstamathābravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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