वाल्मीकि रामायण 6.74.71
स तेन शैलेन भृशं रराज शैलोपमो गन्धवहात्मजस्तु।सहस्रधारेण सपावकेन चक्रेण खे विष्णुरिवार्पितेन॥
sa tena śailena bhṛśaṃ rarāja śailopamo gandhavahātmajastu |sahasradhāreṇa sapāvakena cakreṇa khe viṣṇurivārpitena ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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