वाल्मीकि रामायण 6.75.28
लङ्कायां दह्यमानायां शुशुभे स महार्णवः।छायासंसक्तसलिलो लोहितोद इवार्णवः॥
laṅkāyāṃ dahyamānāyāṃ śuśubhe sa mahārṇavaḥ |chāyāsaṃsaktasalilo lohitoda ivārṇavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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