वाल्मीकि रामायण 6.75.53
पताकाध्वजसंसक्तमुत्तमासिपरश्वधम्।भीमाश्वरथमातङ्गं नानापत्तिसमाकुलम्॥
patākādhvajasaṃsaktamuttamāsiparaśvadham |bhīmāśvarathamātaṅgaṃ nānāpattisamākulam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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