वाल्मीकि रामायण 6.75.7
प्रासादाः पर्वताकाराः पतन्ति धरणीतले।अगरुर्दह्यते तत्र वर च हरिचन्दनम्॥
prāsādāḥ parvatākārāḥ patanti dharaṇītale |agarurdahyate tatra vara ca haricandanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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