वाल्मीकि रामायण 6.75.71
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये श्रीमद्युद्धकाण्डे पञ्चसप्ततितमः सर्गः॥
ityārṣe śrīmadrāmāyaṇe vālmīkīye ādikāvye śrīmadyuddhakāṇḍe pañcasaptatitamaḥ sargaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें