वाल्मीकि रामायण 6.76.48
सो ऽङ्गदं विविधैर्बाणैः कुम्भो विव्याध वीर्यवान्।अकुण्ठधारैर्निशितैस्तीक्ष्णैः कनकभूषणैः॥
so 'ṅgadaṃ vividhairbāṇaiḥ kumbho vivyādha vīryavān |akuṇṭhadhārairniśitaistīkṣṇaiḥ kanakabhūṣaṇaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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