वाल्मीकि रामायण 6.77.16
तमुद्यम्य महातेजा निकुम्भोरसि वीर्यवान्।अभिचिक्षेप वेगेन वेगवान् वायुविक्रमः॥
tamudyamya mahātejā nikumbhorasi vīryavān |abhicikṣepa vegena vegavān vāyuvikramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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