वाल्मीकि रामायण 6.77.23
परिगृह्य च बाहुभ्यां परिवृत्य शिरोधराम्।उत्पाटयामास शिरो भैरवं नदतो महत्॥
parigṛhya ca bāhubhyāṃ parivṛtya śirodharām |utpāṭayāmāsa śiro bhairavaṃ nadato mahat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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