वाल्मीकि रामायण 6.78.12
अद्य शूलनिपातैश्च वानराणां महाचमूम्।प्रदहिष्यामि सम्प्राप्तः शुष्केन्धनमिवानलः॥
adya śūlanipātaiśca vānarāṇāṃ mahācamūm |pradahiṣyāmi samprāptaḥ śuṣkendhanamivānalaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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